Shree Ganesh Namah Shree Pardeshwaray Namah Shiv Dham
"भाविउ मेटि सकहिं त्रिपुरारी"
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“ रसात्परतरं लिङ्गं न भूतो न भविष्यति ”

अर्थात पारदेश्वर से श्रेष्ठ शिवलिंग न हुआ है और न होगा|
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“रसलिङ्गः महालिङ्गं शिवशक्ति निकेतनम् |
लिङ्गः शिवालियमं प्रोक्तं सिद्धिदं सर्व देहिनाम् ||”

अर्थात पारद शिवलिंग श्रेष्ठ शिवलिंग होता है, इसमें भगवान शिव की शक्तियों का वास होता है, इसलिए इसे शिवालय भी कहा जाता है, इससे सभी प्राणियों को संपन्नता और सुख की प्राप्ति होती है|
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“तन्न्मेमनः शिवसंकल्पमस्तु”

हमरा मन कल्याणकारी विचार करने वाला बने |
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“धर्मार्थकाममोक्षाख्या पुरुषार्थश्चतुर्विधा:
सिद्ध्यन्ति नात्र सन्देहो रसराजप्रसादत:”

अर्थात जो मनुष्य पारद शिवलिंग की एक बार भी पूजन कर लेता है। उसे इस जीवन में ही धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष इन चारों प्रकार के पुरुषार्थो की प्राप्ति हो जाती है। इसमें संदेह करने का लेशमात्र भी कारण नहीं है।
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“धन्यास्ते पुरुषः लोके येSर्चयन्ति रसेश्वरं |
सर्वपापहरं देवं सर्वकामफलप्रदम्॥”

अर्थात् संसार में वे मनुष्य धन्य हैं जो समस्त पापों को नष्ट करने वाले तथा समस्त मनोवांछित फलों को प्रदान करने वाले पारद शिवलिंग की पूजन करते हैं और पूर्ण भौतिक सुख प्राप्त कर परम गति को प्राप्त कर सकते हैं।
पूर्व आंगे

पारद शिवलिंग (रसलिंग) का महत्व

पारद शिवलिंग दर्शन मात्र से ही मोक्ष का दाता है इसके पूजा गृह में रहने मात्र से ही सुयश, आजीविका में सफलता, सम्मान. पद प्रतिष्ठा ऐवम लक्ष्मी का सतत आगमन होता है।

भारतीय संस्कृति का विशिष्टय है कि इसका निर्माण अध्यात्म की सुदृढ़ भित्ती पर उन महर्षियों के द्वारा किया गया है जो की राग – द्वेष से रहित , त्रिकालदर्शी एवं दिव्य दृष्टि सम्पन्न थे | इन्होंने अपनी तपः पूत बुद्धि से दिव्य ईश्वरीय ज्ञान प्राप्त कर ऐसी युक्तियों का एवं साधनाओं का ज्ञान हमें दिया है जो सामान्य मानव की बुद्धि से परे है |

कोष तो हमारे पास है और चाबी भी है किन्तु आवश्याकता है सद्गुरु एवं ज्ञानदाता की, जो हमें बता दें कि चाबी-ताले में डालकर किस विधि से घुमायें कि कोष कि हाथ लग जावे।

मनुष्य को प्रयत्नों से भौतिक सुख तो प्राप्त हो सकते है किन्तु आत्म बोध ईश्वर की अनुकम्पा से ही सम्भव है।

पारद शिवलिंग (रसलिंग) भुक्ति एवं मुक्ति का दाता है एवं इनकी प्राप्ति में ही जीवन की पूर्ण सार्थकता है। इसकी प्राप्ति, दर्शन, अर्चन से पूर्व जन्म के पाप नष्ट होते हैं ,एवं भाग्य का उदय होता है| पारद का शोधन कर उसे ठोस रूप में परिणत करना अत्यंत कठिन एवं असम्भव को सम्भव में बदल देना है अतः पारद शिवलिंग अत्यंत दुर्लभ है। तथापि सौभाग्य से जो व्यक्ति इस दुर्लभ पारद शिवलिंग को प्राप्त कर अपने घर में इसकी पूजा करते हैं वे अपनी कई पीड़ियों तक को सुसम्पन्न बना देते हैं। साथ ही वे व्यक्ति स्वयं भी इस जगत में धन धान्य पूर्ण तथा सुख सुविधा पूर्ण जीवन यापन करते हैं। जीवन में जो लोग उन्नति के शिखर पर पहुचना चाहते हैं। या जो लोग आर्थिक, राजनौतिक, व्यापारिक सफलता चाहते हैं उन्हें पारद शिवलिंग (रसलिंग) का पूजन अपने घर में अवश्य करना चाहिये। यह मोक्ष प्राप्ति का अद्वितीय एवम सुनिश्चित साधन है।   आंगे पढ़ें


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सूचना पटल

  • 07 फरवरी 2016: श्री पारदेश्वर भगवान के 7वें स्थापना दिवस के पावन अवसर पर सभी पारदेश्वर भक्त सादर आमंत्रित हैं |

  • शिवधाम में दैनिक आयोजित होने वाले दैनिक कार्यक्रमों में सभी भक्त गण सादर आमंत्रित हैं|